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🌿 मूंगफली (Groundnut) की फसल में वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग

मूंगफली की अधिक पैदावार और तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए किसानों की मार्गदर्शिका।

📅 प्रकाशित: मार्च 2024  |  ✍️ मिट्टी गोल्ड ऑर्गेनिक  |  🗂️ मूंगफली की खेती

Vermicompost use in Groundnut Farming

आवेदन दरें

मूंगफली (Peanut) की जड़ों (pegs) को विकसित होने के लिए भुरभुरी और कैल्शियम युक्त मिट्टी की आवश्यकता होती है। अनुशंसित मात्रा 300 से 400 किग्रा वर्मीकम्पोस्ट प्रति बीघा है।चूंकि मूंगफली खुद नाइट्रोजन बनाती है, इसलिए वर्मीकम्पोस्ट का मुख्य काम कैल्शियम, सल्फर और फॉस्फोरस प्रदान करना है।

कब आवेदन करें

आदर्श रूप से पूरी मात्रा बुवाई से पहले मिट्टी तैयार करते समय डालनी चाहिए। फूल आने के समय (30-40 दिन) एक अतिरिक्त खुराक भी दी जा सकती है।

चरण-दर-चरण आवेदन मार्गदर्शिका

1

मिट्टी की तैयारी

अंतिम जुताई के दौरान 300-400 किलो वर्मीकम्पोस्ट प्रति बीघा पूरे खेत में बिखेरें।

2

गहरी जुताई

खाद को मिट्टी के ऊपरी 6 इंच में अच्छी तरह मिलाएं ताकि बाद में फलियाँ आसानी से जमीन में जा सकें।

3

बुवाई

उपजाऊ मिट्टी में अनुशंसित गहराई पर मूंगफली के बीज बोएं।

4

फूल आने पर पोषण

30-40 दिनों (फूल आने) पर, यदि उपलब्ध हो तो जिप्सम के साथ मिलाकर खाद का हल्का छिड़काव करें।

5

नमी प्रबंधन

सुनिश्चित करें कि मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी रहे ताकि सूक्ष्मजीव सक्रिय रहें।

रोगों से सुरक्षा

मिट्टी गोल्ड वर्मीकम्पोस्ट वैस्कुलर विल्ट और रेड रॉट (गन्ने में) के खिलाफ एक मजबूत बचाव बनाता है। यह मिट्टी के कार्बन को बढ़ाता है, जो उन सूक्ष्मजीवों का समर्थन करता है जो प्राकृतिक रूप से टिक्का रोग और बॉल रॉट को दबाते हैं।

परिणाम और फायदे

  • भुरभुरी मिट्टी: यूरिया मिट्टी को कठोर (हार्डपैन) बना देता है, लेकिन वर्मीकम्पोस्ट मिट्टी को नरम रखता है जिससे 30% अधिक फलियां सफलतापूर्वक बनती हैं।
  • भारी दाने और अधिक तेल: प्राकृतिक खनिज सीधे मूंगफली के वजन को बढ़ाते हैं और कुल तेल प्रतिशत में 2-4% सुधार करते हैं।
  • टिक्का रोग (Tikka Disease) से बचाव: इसमें मौजूद ट्राइकोडर्मा फफूंद खतरनाक टिक्का रोग के हमलों को रोकता है।

राइजोबियम और सूक्ष्मजीव

मूंगफली हवा से नाइट्रोजन लेने के लिए राइजोबियम (Rhizobium) बैक्टीरिया पर निर्भर है। वर्मीकम्पोस्ट इन बैक्टीरिया के लिए भोजन है, जिससे इनकी संख्या तेजी से बढ़ती है। इससे जड़ों में नाइट्रोजन की गांठे बड़ी बनती हैं।

बाजार और निर्यात (Export) लाभ

  • किसानों के लिए: जैविक मूंगफली की कोल्ड-प्रेस (Cold-pressed) ऑर्गेनिक मूंगफली तेल बनाने वाली कंपनियों में भारी मांग है।
  • निर्यात (Export) के लिए: रासायनिक खादों से उगाए गए मूंगफली में एफ्लाटॉक्सिन (Aflatoxin) नाम का खतरनाक फंगस आ जाता है जिससे निर्यात रद्द हो जाता है। वर्मीकम्पोस्ट इसे रोकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – मूंगफली

क्या मूंगफली में वर्मीकम्पोस्ट के साथ अतिरिक्त नाइट्रोजन चाहिए? +
नहीं। मूंगफली हवा से खुद नाइट्रोजन अवशोषित करती है। वर्मीकम्पोस्ट केवल जड़ों के बैक्टीरिया को ऐसा करने के लिए सही वातावरण प्रदान करता है।
वर्मीकम्पोस्ट से तेल की मात्रा कैसे बढ़ती है? +
वर्मीकम्पोस्ट में कार्बनिक सल्फर और कैल्शियम होता है, जो मूंगफली के बीज में तेल के निर्माण के लिए सबसे जरूरी तत्व हैं।
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